Sunday, February 12, 2006

Ek Phool aur Ek Boond

YOON TOH YE HAR US BOOND KI KAHANI HAI JISKE JANAM LENE SE PAHLE MRITYOO KI SUBAH USKI KISMAT MEIN LIKH DI JATI HAI, PAR AGAR KISI PHOOL PE ZAMI US BOOND KO US PHOOL KA PYAR MIL JAYE TOH USKI KISMAT MEIN SHYAD DIN KA UJALA BHI LIKHA JA SAKTA HAI..
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एक अन्धेरी रात थी । आधा चन्द्र्मा आकाश में तैर रहा था । कुछ इक्के-दुक्के बादल वादियों में खेल रहे थे । रात में नमी थी । इन सब के बीच एक अत्यन्त ही खूबसूरत फूल चाँद को निहार रहा था । उनमें दो बातें भी हो रहीं थीं । इसी बीच रात में फैली नमी के कुछ कणों को वह फूल पसन्द आ गया और वे उन पंखुड़ियों पे धीरे-धीरे ज़मा होने लगे । अन्त में उन कणों ने ऒस की बून्द का आकार ले लिया । एक छोटी सी बून्द उस फूल कि पंखुड़ियों पर चन्द्र्मा कि भींगी चांद्नी में उससे बातें करने लगी । फूल और बूंद में दोस्ती हो गई । लेकिन इसी बीच वो बून्द चुपके-चुपके उस फूल से प्यार भी करने लगा । फूल को इसकी खबर तक ना थी । फिर सुर्य की पहली किरण ने धरती को चूमा और इन किरणों के ज्योतिर्मय प्रकाश में वो बून्द और भी चमक उठी । अब फूल की खूबसूरती पहले से कई गुना बढ़ गई थी । धीरे-धीरे सुर्य का प्रकाश इस फूल को जलाने लगा । बून्द इसे बर्दाश्त न कर सकता था । इससे पहले कि उसके उस हसीन दोस्त पे थोड़ी आँच भी आये उसने खुद को उन किरणों में जला डाला । अब अकेली रह गई थी वो फूल और बिखर गया था उसके दोस्त बून्द का प्यार ।

क्या यही हर बून्द की कहानी है ? क्या उसे इसीतरह मिटना पड़ेगा हर बार ? अगर फूल को पता चल जाता कि वह बून्द उसे इतना प्यार करता था तो क्या वह उसे अपनी पंखुड़ियों में ना छुपा लेती ? फिर तो न वह बून्द जलता और ना ही वह फूल । उस छोटी बून्द की नमी सदा फूल को नयी ताज़गी देती रहती ना । क्या हर बून्द का अगली सुबह उड़ जाना ही उसकि किस्मत में लिखा है ? क्या उसे उसका प्यार कभी नहीं मिल सकता ? यह सब तो अब उस फूल की इच्छा और अनिच्छा पे निर्भर करता है, पता नहीं शायद अगली रात उसे कोई नया उसी बून्द के जैसा साथी मिल जाये या फिर ये भी हो सकता है कि अगली रात आकाश बादलों से भरी मिले, फिर तो ना चन्द्र्मा होगा और ना ही कोई ओस की बून्द बनेगी । बस बारिश के थपेड़ों में अगली सुबह के आने का इन्तज़ार शेष रह जायेगा ।
:-aiveyee
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4 Comments:

At Friday, February 17, 2006 3:40:00 AM, Blogger Baadal said...

Yeah, I had shown him this column of words in one of my mail..
Thanks for visiting the page..

 
At Thursday, May 18, 2006 10:00:00 PM, Blogger Aurora said...

nice read:)))
is it written by u

 
At Friday, May 19, 2006 4:11:00 AM, Blogger Baadal said...

Thanks!!
Yeah, I wrote it.
Nice to see you here !!

 
At Saturday, September 02, 2006 8:36:00 AM, Blogger Pramod Yadav said...

Yes Its Depend on ur love... ur love for her/him

 

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